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बिना टेंडर कॉलेज भवन ध्वस्तीकरण! नपा घिरी,नगर कांग्रेस ने उठाई जांच की मांग 

मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग

बिना टेंडर कॉलेज भवन ध्वस्तीकरण! नपा घिरी,नगर कांग्रेस ने उठाई जांच की मांग 

संवाददाता धनंजय जोशी

जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

नगर पालिका पांढुर्णा एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। कॉम्प्लेक्स निर्माण के नाम पर पुराने सरकारी कॉलेज की बिल्डिंग को बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए और बिना प्रशिक्षित कर्मचारियों से तुड़वाए जाने का मामला अब बड़ा विवाद बनता जा रहा है। इस घटनाक्रम ने न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार की आशंका को भी हवा दी है।
मामले को लेकर नगर कांग्रेस कमेटी खुलकर विरोध में उतर आई है। नगर कांग्रेस अध्यक्ष जयंत घोड़े एवं सलाहकार तुलसी काटोले के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अनुविभागीय अधिकारी अल्का इक्का को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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बिना नियम तोड़ी गई सरकारी संपत्ति?:-
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि नगर पालिका द्वारा बिना किसी वैधानिक अनुमति के सरकारी कॉलेज की पुरानी बिल्डिंग को ध्वस्त किया जा रहा है। सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि इस कार्य में न तो नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई और न ही प्रशिक्षित एजेंसी को जिम्मेदारी दी गई।
सरकारी नियमों के अनुसार किसी भी निर्माण या ध्वस्तीकरण कार्य के लिए पारदर्शी निविदा प्रक्रिया अनिवार्य होती है, लेकिन यहां खुलेआम नियमों की अनदेखी की गई। इससे यह मामला केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

कौन जिम्मेदार? आदेश किसने दिया:-
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि यह स्पष्ट किया जाए कि आखिर इस ध्वस्तीकरण का आदेश किस अधिकारी ने दिया और बिना टेंडर कार्य कराने के पीछे कौन जिम्मेदार है। कांग्रेस ने साफ तौर पर कहा है कि दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

गरमाई शहर की सियासत ,जनता में भी आक्रोश:-
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद पांढुर्णा की सियासत गरमा गई है। विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बना लिया है, वहीं आम नागरिक भी अब पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि यदि सरकारी संपत्ति को इस तरह नियमों को दरकिनार कर ध्वस्त किया जाएगा, तो यह सीधे-सीधे शासन व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इस गंभीर मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।

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